भारत को सुपर पावर बनाने के लिए शिक्षा प्रणाली में सुधार की जरूरत

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How To Improve Education System In India

Published in Hindi Lokmat News

मनुष्य हमेशा से ही अपनी बुद्धि के प्रति बहुत जागरूक रहा है. एहि कारण है कि वह ज्ञान  को पाने के  लिए हमेशा तत्पर  रहा  है. आज जिस संसार में हम  रह रहे हैं यह सारा का सारा मनुष्य का बनाया हुआ है. इनफार्मेशन टेक्नोलॉजी, सूचना प्रणाली, कम्प्यूटर्स, हवाई यात्रा या अंतरिक्ष यात्रा; सब के सब मनुष्य के परामर्श से ही संभव हुए हैं. आज का युग केवल ज्ञान का युग है. यहाँ तक कि आज बिना ज्ञान का मनुष्य केवल अज्ञानी नहीं  बल्कि पिछड़ा भी कहलाता है. ज्ञान ने अपनी उस चरम सीमा को आज छू लिया है जिसे वह सदियों से पाने की चेष्टा में था. यह कहना कदापि ग़लत नहीं होगा कि आज जो स्थान मनुष्य ने पाया है वह केवल ज्ञान को पीढ़ी दर पीढ़ी आगे बढ़ाने से ही संभव हुआ है. आज के इस दौर में मनुष्य हर रोज़ कुछ न्य कर गुजरने की चाह में है और उसने ऐसा किया भी है. फिर चाहे वह युद्ध प्रणाली हो या गुप्तचर सेवाएं या फिर संचार का माध्यम, जो भी आज हम देखते हैं यह केवल सूचना का आदान प्रदान ही तो है. यही कारण है की इस युग को मई Information Era (सूचना युग) कहता आया हु. इस समय का सब से महत्त्वपूर्ण अंश यह भी है के इस समय को अधिक से अधिक सूचना ग्रहण करने में व्यय किया जाये. जब हम शिक्षा की बात करते हैं तो हमें अपने इतिहास को भी याद रखना चाहिए जो हमें हमेशा से ही शिक्षा एवं शिक्षित समाज  की ओर ही बढ़ाता रहा है. विश्व की शिक्षा प्रणाली में विश्वविद्यालयों का काफी योगदान रहा है और भारत को इस में पहल हासिल है. नालंदा विश्वविद्यालय ही असल में इस प्रणाली की नीव है. विशेषज्ञों का तो यहाँ तक भी कहना है के ईसा मसीह भी इस संस्थान में आये और उन्होंने अपनी शिक्षाओं का यहाँ ज्ञान दिया और फिर कौन नहीं जानता सुप्रसिद्ध महान सम्राट अशोक को या उनके आचार्य चाणक्य को. अर्थशास्त्र के शिलान्यास अथवा राजनीती विज्ञानं के धनि जिन्होंने भारत को एक अखंड भारत का स्वपन दिखाया जिसे आप भी हम जी रहे हैं. कहने का तात्पर्य यह है कि भारत सदियों से ही ज्ञान की श्रेणी में अग्रसर रहा है. आज की हमारी शिक्षा प्रणाली बहुत से मूल्यों पर आधारित है. हर नए साल में नई शिक्षा नीतियां दर्शातीं हैं कि आज भी हम शिक्षा में नित नए बदलाव देखना चाह रहे हैं. विदेश शिक्षा भी इसी श्रृंखला का एक अंश है. आज़ादी के समय से ही हम सुनते आये हैं के बापू गाँधी बेरिस्टर की शिक्षा इंग्लैंड से लेकर आये थे जो उस समय की एक महान शक्ति रहा , फिर डॉ. भीमराव आंबेडकर , पंडित जवाहर लाल नेहरू; यह सब के सब महान लोग विदेशों से नई शिक्षा प्रणाली लेकर आये जो आगे चल कर हमारे देश के बहुत काम भी आयी और हमारी अपनी शिक्षा प्रणाली में बदलाव का कारण भी बनी.आज भी लाखों भारतीय विद्यार्थी शिक्षा ग्रहण करने के लिए विदेश जाते हैं और अंतर्राष्ट्रीय समुदाय में भारत के योगदान का प्रतीक बनते हैं. मेडिकल, इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, लॉ और ऐसी बहुत सी विभिन्न शिक्षाओं को लेकर उसे विश्व में प्रचार करते हैं.  दुसरे विश्व युद्ध के बाद आज की स्थिति में USA एक सुपर पावर की तरह उभरा है. सुपर पावर होने के कदापि यह तात्पर्य नहीं है कि उनके पास अति सक्षम युद्ध प्रणाली है बल्कि सुपर पावर अपने आप में विभिन्न विशेषताओं का समावेश है। आज अमेरिका यौद्धिक कौशल के अलावा बैंकिंग प्रणाली, इन्शुरन्स सिस्टम, मेडिकल सर्विसेज, और शिक्षा के मैदान में भी अग्रसर है. यही कारण है कि आज भी भारत से लगभग 5 लाख से भी अधिक विद्यार्थी हर वर्ष USA जाते हैं। यूरोप का भी अपना एक स्थान है शिक्षा के मैदान में, जहा इंग्लैंड अपनी मैनेजमेंट स्टडीज के लिए जाना जाता है वहीँ पर जर्मनी भी है जो अपनी इंजीनियरिंग टेक्नोलॉजी के लिए जाना जाता है, फ्रांस और स्विट्ज़रलैंड अपनी हॉस्पिटैलिटी मनागमेनेट की शिक्षा के लिए विश्व प्रसिद्ध हैं। मुझे  जब भी मौका मिलता है स्टूडेंट्स की काउंसलिंग करने का तो अक्सर मैं देखता हु के अधिकतर स्टूडेंट्स का झुकाव विदेश शिक्षा में है। काउंसलिंग लेने से उनके रास्ते साफ़ हो जाते हैं उनके संदेह दूर हो जाते हैं जिनके कारण उनको दर लगा रहता है।करियर काउंसलिंग एक बहुत ही लाभदायक उपाय है अपनी चिंताओं से मुक्त होकर आगे बढ़ने का। बहुत से विद्यार्थियों को बहुत सी बातों का ज्ञान नहीं होता लेकिन एक सक्षम काउंसलर वही होता है जो हर पहलु को ध्यान में रखते हुए काउंसलिंग करे। फिर चाहे वह भविष्य रोज़गार नीति हो या geo-political स्थितियां या फिर Climate Change ; हर पहलु को ध्यान में रखते हुए और स्टूडेंट की मानसिक व मनोवैज्ञानिक स्थिति को नज़रअंदाज़ किये बिना काउंसलिंग करना ही एक सही काउंसेलर का उद्देश्य होना चाहिए। 


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